श्वः कार्यमद्य कुर्वीत पूर्वाह्णे चापराह्णकम् ।
न हि प्रतीक्षते मृत्युः कृतमस्य न वा कृतम् ॥ –   महाभारत, शान्तिपर्व, अध्याय 277 

Do it today what needs to be done tomorrow, in the morning what needs to be done in the afternoon. Death doesn’t see, what one has achieved and what is pending to be achieved. 

जो कार्य कल किया जाना है उसे पुरुष आज ही संपन्न कर ले, और जो अपराह्न में किया जाना हो उसे पूर्वाह्न में कर ले, क्योंकि मृत्यु प्रतीक्षा नहीं करती, कि कार्य संपन्न कर लिया गया हैं या नहीं ।

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