How Veda Vyas (वेद व्यास) got his name ?

It is mentioned in Mahabharata Adi Parva chapter 63 verse 87-88 :

पादापसारिणं धर्मं स तु विद्वान्युगे युगे।
आयुः शक्तिं च मर्त्यानां युगावस्थामवेक्ष्यच।।
ब्रह्मणो ब्राह्मणानां च तथानुग्रहकाङ्क्षया।
विव्यास वेदान्यस्मत्स तस्माद्व्यास इति स्मृतः।।

Krishna Dvaipayana (कृष्णद्वैपायन ) saw that at the end of every Yuga, one part of Dharma is getting lost. Age and power of humans are diminishing and the state of Yuga is also distorted. Seeing these with a desire to bless Veda & Brahmans, he extended the single Veda into four Vedas, and therefore he is called as Veda Vyas. ( विव्यास वेदान् यस्मात् स तस्मात् व्यास इति स्मृतः )

विव्यास वेदान् यस्मात् स तस्मात् व्यास इति स्मृतः – इन्होने वेदो का विस्तार किया, इसलिए वेद व्यास नाम से प्रसिद्ध है

वेद व्यास ने ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद को क्रमशः अपने शिष्य पैल, जैमिनि, वैशम्पायन और सुमन्तु  मुनि को पढ़ाया

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