Importance of Gita

Highlighted by Vaishampayana (वैशंपायन) in Mahabharata Bhisma Parva chapter 43

गीता सुगीता कर्तव्या किमन्यैः शास्त्रविस्तरैः।
या स्वयं पद्मनाभस्य मुखपद्माद्विनिःसृता।। Mahabharata 6.43.1

जो श्रीविष्णु भगवान के मुखकमल से निकली हुई है वह गीता अच्छी तरह कण्ठस्थ करना चाहिए । अन्य शास्त्रों के विस्तार से क्या लाभ?

Shrimad Bhagavata Gita which came out from the mouth of Lord Vishnu, please learn and understand the same. There seems to be no need for other scriptures.

सर्वशास्त्रमयी गीता सर्वदेवमयो हरिः।
सर्वतीर्थमयी गङ्गा सर्ववेदमयो मनुः ।। 6-43-2

गीता जी सर्वशास्त्रमयी हैं। श्री हरि सर्वदेवमय हैं ! गंगा सर्वतीर्थमयी है ! मनु सर्ववेदमय​ हैं, !

Shrimad Bhagavata Gita is includes teaching of all other scriptures, Lord Hari includes all other devata, Ganga includes all the holy places, and Manu ( Manu-smriti ) includes all the Vedas.

गीता गङ्गा च गायत्री गोविन्देति हृदि स्थिते।
चतुर्गकारसंयुक्ते पुनर्जन्म न विद्यते ।। 6-43-3

गीता, गंगा, गायत्री और गोविंद -इन ‘गकार’ युक्त चार नामों को ह्रदय में थारण कर लेने पर मनुष्य का फिर इस संसार में पुनर्जन्म नहीं होता।।

Gita, Ganga, Gayathri and Govind – all these four who include “G” letter, if one uphold these four in his heart, he will be liberated from this world.

षट्शतानि सविंशानि श्लोकानां प्राह केशवः।
अर्जुनः सप्तपञ्चाशत्सप्तषष्टिं तु सञ्जयः।। 6-43-4
धृतराष्ट्रः श्लोकमेकं गीताया मानमुच्यते ।

In Shrimad Bhagavata Gita, Keshava spoke 620 Slokas; Arjuna spoke 57; Sanjaya spoke 67; and Dhritarashtra spoke 1 sloka. This is the length of Gita.

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