Why was Draupadi called as Sairandhri (सैरन्ध्री ) ?

Sairandhri (सैरन्ध्री)  –  means female attendant or a maid servant

Draupadi acted as servant to Sudeshna(सुदेष्णा), queen of King Virata of Matsya Kingdom, where Pandavas spent their Agatavasa (अज्ञातवास)

As explained by Draupadi herself the meaning of Sairandhri (सैरन्ध्री)  in Mahabharata Virat Para chapter 3 verse 18-19

सैरन्ध्र्यो रक्षिता लोके भुजिष्याः सन्ति भारत ।
नैवमन्याः स्त्रियो यान्ति इति लोकस्य निश्चयः ॥
साहं ब्रुवाणा सैरन्ध्री कुशला केशकर्मणि ॥ 18 ॥
युधिष्ठिरस्य गेहे वै द्रौपद्याः परिचारिका ।
उषितास्मीति वक्ष्यामि  पृष्टा राज्ञा च भारत ॥ 19 ॥

द्रौपदीने कहा- भारत ! इस जगत्में बहुत सी ऐसी स्त्रियाँ हैं, जिनका दूसरों के घरोंमें पालन होता है और जो शिल्पकर्मो द्वारा जीवन निर्वाह करती हैं। वे अपने सदाचार से स्वतः सुरक्षित होती है। ऐसी स्त्रियोंको सैरन्ध्री कहते हैं। लोगोंको अच्छी तरह मालूम है कि सैरन्ध्रीकी भाँति दूसरी स्त्रियाँ बाहर की यात्रा नहीं करतीं, [ अतः सैरन्ध्रीके वेश में मुझे कोई पहचान नहीं सकेगा।] इसलिये मैं सैरन्ध्री कहकर अपना परिचय दूँगी । बालों को सँवारने और वेणी-रचना आदिके कार्यमें मैं बहुत निपुण हूँ। यदि राजा मुझसे पूछेंगे, तो कह दूँगी कि मैं महाराज युधिष्ठिरके महलमें महारानी द्रौपदी की परिचारिका बनकर रही हूँ’ ।।

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