सस्यमिव मर्त्यः पच्यते

सस्यमिव मर्त्यः पच्यते

When Nachiketa was given to Yama by his father, and before going to Yamaloka, Nachiketa went into solitude and he uttered...
Knower is himself the Atman

Knower is himself the Atman

Knower is himself the Atman जिह्रा मे अस्ति न वेत्युक्तिर्लज्जायै केवलं यथा ।न बुध्यते मया बोधो बोध्दव्य इति...

जो दृष्टा है, वो विषयों के लिए दुख न करें ।

जो दृष्टा है, वो विषयों के लिए दुख न करें । क्योंकि जब वो सुबह जागता है, तो...
येयं प्रेते विचिकित्सा

तुम देश की “केन्द्रीय सचिव” बनोगी

माता पुत्री से - तुम्हारा जन्म हमारे लिए एक वरदान है, तुम देश की "केन्द्रीय सचिव" बनकर...

मृत्यु के पश्चात यह आत्मा कहा जाता है

बकरी 1 - हे प्रिय​ ! मृत्यु के पश्चात यह आत्मा कहा जाता है अथवा किन लोकों मे विश्राम करता...

यदि भोग ही उद्देश्य हैं

यदि इस संसार मे विषयो को भोग लेना ही उद्देश्य होता, तो पहले विषय को भोगकर ही हम तृप्त हो जाते ।
You want to escape worldly duties.

You want to escape worldly duties

Father to a sanyasi son - "By becoming a Sanyasi you want to escape from worldly duties....
अजरामरवत् प्राज्ञो विद्यामर्थं च चिन्तयेत् ।

मृत्यु केश पकड़कर ले जा रही है

अजरामरवत् प्राज्ञो विद्यामर्थं च चिन्तयेत्।गृहीत इव केशेषु मृत्युना धर्ममाचरेत् ॥ - Hitopadesha verse 3 अन्वयः- अजरामरवत् प्राज्ञः...
Bhagavata Purana Quotes

Bhagavata Purana Quotes

जन्तुर्वै भव एतस्मिन् यां यां योनिमनुव्रजेत् ।तस्यां तस्यां स लभते निर्वतिं न विरज्यते ।।
Mahabharata Quotes

Mahabharata Quotes

न कर्मणा लभ्यते चिन्तया वानाप्यस्ति दाता पुरूषस्य कश्चित् ।पर्याययोगाद् विहितं विधात्राकालेन सर्वं लभते मनुष्यः ।।
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