Pratyagatma (प्रत्यगात्मा) = प्रत्यक् + आत्मा

प्रत्यक् = प्रत्यञ्चति इति (प्रति + अञ्च् धातु + क्विन्-प्रत्यय: )

प्रत्यक् means “the one who has opposite direction”

As mentioned by Adi Sanakra in commentary of Katho upanishad 2.1.1

प्रत्यक् च असौ आत्मा प्रत्यगात्मा – the one who is outward going and also the inside Atman is called as Pratyagatma

What is Atman ?

Adi Sankara further give reference of Linga Purana 1.70.96

यच्चाप्नोति यदादत्ते यच्चात्ति विषयानिह !
यच्चास्य संततो भावस्तस्मादात्मेति कीर्त्यते !!

आत्मा जगत के सभी विषयों में व्याप्त है , सभी विषयों को ग्रहण कर लेता है , सभी विषयों का अनुभव करता है और इसकी सत्ता निरंतर बनी रहती है, इसलिए इसे आत्मा कहा जाता है।

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